कहते हैं कि यदि मेहनत, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिल जाए तो छोटे से व्यवसाय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। इसका जीवंत उदाहरण केवलारी विकासखंड के ग्राम देहवानी निवासी श्री मयूर ठाकुर हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लेकर अपने पारंपरिक दुग्ध संग्रहण व्यवसाय को आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण उद्यम में बदल दिया। आज उनका उद्यम न केवल उन्हें बेहतर आय दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी माध्यम बन गया है।
जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन तथा सहायक संचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार के निर्देशन में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के माध्यम से जिले के युवाओं, किसानों एवं उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने और आय में वृद्धि करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
खास बातें
- श्री मयूर ठाकुर पहले गांवों से दूध एकत्रित कर खुले बाजार में विक्रय किया करते थे।
- जहां पहले उन्हें सीमित आय होती थी, वहीं अब व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 20 से 25 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने लगा।
- वर्तमान में उनके प्रतिष्ठान से छह लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है तथा वे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
श्री मयूर ठाकुर पहले गांवों से दूध एकत्रित कर खुले बाजार में विक्रय किया करते थे। इस कार्य से उन्हें सीमित आय ही प्राप्त होती थी। वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन पर्याप्त पूंजी और तकनीकी संसाधनों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग से संपर्क कर अपनी योजना साझा की कि वे केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि दूध से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहते हैं।
विभागीय अधिकारियों ने उन्हें योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, वित्तीय सहायता तथा अन्य प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। जिला रिसोर्स पर्सन के माध्यम से आवेदन तैयार कराया गया तथा बैंक ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग प्रदान किया गया। परिणामस्वरूप आवेदन प्रस्तुत करने के मात्र 16 दिवस के भीतर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केवलारी शाखा द्वारा उनके उद्यम की स्थापना हेतु 9 लाख 78 हजार 800 रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अर्थात 3 लाख 42 हजार 650 रुपये का अनुदान भी उन्हें प्रदान किया गया।
इस आर्थिक सहायता से श्री मयूर ठाकुर ने फरवरी 2025 में आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण मशीनों की स्थापना की और दूध से खोवा, पनीर, घी, मक्खन एवं दही जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। इससे उनके व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। जहां पहले उन्हें सीमित आय होती थी, वहीं अब व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 20 से 25 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने लगा। उद्यम की शुरुआत के साथ ही उन्होंने दो स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया।
समय के साथ उन्होंने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में अपने व्यवसाय का और विस्तार किया तथा विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का निर्माण भी प्रारंभ कर दिया। उच्च गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन प्रक्रिया और ग्राहकों के विश्वास के कारण उनके उत्पादों की स्थानीय बाजार में तेजी से पहचान बनी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने नैनपुर विकासखंड में अपनी मिठाई की दुकान भी स्थापित की, जिससे उनके व्यवसाय को और अधिक गति मिली।
आज श्री मयूर ठाकुर का उद्यम निरंतर प्रगति कर रहा है। वर्तमान में उनके प्रतिष्ठान से छह लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है तथा वे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि अन्य परिवारों की आजीविका को भी संबल मिला है।
श्री मयूर ठाकुर की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि व्यक्ति में आगे बढ़ने का संकल्प हो और उसे शासन की योजनाओं का समय पर लाभ तथा विभागीय मार्गदर्शन प्राप्त हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।





