शिखरों से शिल्प तक
खजुराहो के मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला के संतुलन के लिए पहचाने जाते हैं। UNESCO इनके प्रमुख विकास का संबंध चंदेल वंश के 950 से 1050 के बीच के उत्कर्ष से जोड़ता है। समूह में हिंदू और जैन धार्मिक परंपराओं के मंदिर शामिल हैं।
एक संरचना को पढ़ने का तरीका
ऊँचे चबूतरे, शिखर, दीवारों पर शिल्प और पूरे मंदिर का अनुपात मिलकर अनुभव बनाते हैं। कंदरिया महादेव मंदिर की मूर्तिकला को UNESCO विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताता है। विवरणों के साथ पूरी संरचना को देखना खजुराहो की कला समझने का अच्छा रास्ता है।
एमपी की साझा धरोहर
1986 से विश्व धरोहर सूची में शामिल यह स्थल राज्य की सांस्कृतिक पहचान का बड़ा हिस्सा है। परिसर की व्याख्या और संग्रहालय में समय देकर यात्रा को तस्वीरों से आगे बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान प्रवेश व्यवस्था आधिकारिक पर्यटन या पुरातत्व माध्यम से देखें।
स्रोत
- UNESCO: खजुराहो के स्मारक समूह ↗UNESCO World Heritage Centre




